#H493
नज़रअंदाज़
आज नज़रअंदाज़ कर लो।
पर नज़रअंदाज़ न कर पाओगे।
एक दिन ज़रूर मुझे बुलाओगे,
जब मख्खनबाज़ों से बाज़ आओगे।
खुद पर अभिमान करो,
जैसे ताक़तवर के सामने
नीचे न अपनी शान हो।
चन्द्रगुप्त मौर्य ने
सिकंदर के सामने किया।
अपना सम्मान करो,
बेवजह न किसी को
नज़रअंदाज़ करो।
कमज़ोर पर न ज़ोर दिखाओ,
उस पर न कोई दांव आज़माओ।
यह अभिमान नहीं, बाल-अहंकार है —
बच्चों-सी समझ दिखाएगा,
जो तेरा मान-सम्मान सब ले जाएगा।
फिर तू नज़र मिलाने आएगा,
पर सम्मान नहीं पाएगा।
अगर समान सद्भाव न रख पाएगा,
और पक्षपात को बढ़ाता जाएगा —
चापलूसों से घिरा रहेगा,
तो धोखा भी एक दिन खाएगा,
नज़रें मिलाने लायक नहीं रह जाएगा।
अपना जो होगा, देखा जाएगा।
न ग़लत किया है,
न किसी का अपमान किया है —
फिर मेरी नज़रों से
कोई कैसे नज़र मिलाएगा ?
देवेन्द्र प्रताप "नासमझ"
दिनांक 24 जुलाई 2025,©
रेटिंग 9.3/10
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