Sunday, August 24, 2025

#H488 आदतों से बनता भविष्य

#H488
आदतों से बनता भविष्य

सुबह खुद नहीं उठता हूँ।
कई बार उठने के लिए
मम्मी की आवाज सुनता हूँ।
मैं हर बार "5 मिनट बाद"
उठने की बात दोहराता हूँ।
जबर्दस्ती उठाया तो
दूसरे कमरे में सो जाता हूँ।
फिर सुबह देर से उठता हूँ।

सीधा मंजन करने जाता हूँ।
मल त्याग नहीं करता हूँ।
फिर जल्दी-जल्दी
स्नान कर लेता हूँ।
अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता
कमज़ोर पाता हूँ।

यूनिफ़ॉर्म के देने के लिए
शोर मचाता हूँ।
अक्सर नाश्ता नहीं करता हूँ।
जूते अक्सर गंदे पाता हूँ।

स्कूल चला जाता हूँ।
स्कूल से आता हूँ।
कई बार दोपहर का खाना
वापस ले आता हूँ।
बैग में लंचबॉक्स
रखा रहने देता हूँ।
कई दिन बैग में पड़ा रहता है।
फिर डाँट बहुत खाता हूँ।

मोज़े कहीं फेंकता हूँ,
यूनिफ़ॉर्म कहीं डाल देता हूँ।
टीवी देखने लग जाता हूँ।

शाम को खेलने भाग जाता हूँ।
अंधेरा होने पर भी
वापस नहीं आता हूँ।
मैं तो बस लाया जाता हूँ।
फिर टीवी
देखने की ज़िद करता हूँ।
हर पाँच मिनट बाद की
बात दोहराता हूँ।
बार-बार पढ़ने के लिए
मम्मी से आवाज सुनता हूँ।

खाना भी बार-बार
बोलने के बाद ही खाता हूँ।
पढ़ने के नाम पर
फिर सो जाता हूँ।
टीवी या मोबाइल देखने को
तो देर रात तक जागता हूँ।

स्कूल बैग नहीं लगाता हूँ।
मम्मी से लगाने की
गुहार लगाता हूँ।

किताबें ढंग से नहीं रखता हूँ।
इधर-उधर पूरे घर में फैलाता हूँ।
यूनिफ़ॉर्म, बेल्ट, आईडी कार्ड
अक्सर इधर-उधर डाल देता हूँ।

सुबह स्कूल जाने पर
या तो भूल जाता हूँ,
या फिर न मिलने पर
स्कूल चला जाता हूँ।
सुबह-सुबह घर में अक्सर
स्कूल न जाने को
झगड़ा करता हूँ।

मैं कैसे इसको
अनुशासन में लाऊँ,
समझ नहीं पाता हूँ।
बिना अच्छी आदतों के
कैसे इसका अच्छा जीवन
बनता देख पाऊँ।
अपने जीवन की ग़लतियाँ
इसमें कैसे देख पाऊँ।
एक पिता की दुविधा
मैं किसको सुनाऊँ।

उम्मीद करता हूँ—
धीरे-धीरे समझ जाएगा,
अपना जीवन अनुशासन में लाएगा
और सफल हो जाएगा।
वरना अपनी करनी भुगतेगा।
मैं ऐसी हालत घर-घर में
सुनता और देखता हूँ।

दिनांक: 18 अगस्त 2025 ©
रेटिंग: 8.5/10

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